एक्सपर्टस का मानना है की आर्थिक ग्रोथ की राह में दीवार बन सकती हैं तीसरी लहर .

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न्यू दिल्ली : चालू वित्त वर्ष कि पहली तिमाही में देश की ( GDP ) ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक रही है. मगर इंडस्ट्रिस और इकोनॉमिस्ट का कहना है कि आगे की राह आसान नहीं है. अभी भी कोरोना कि तीसरी लहर का सामना करना सबसे बड़ी चुनौती है.

इंडस्ट्री चोबर सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि इस वक्त सबसे अधिक नए निवेश की जरूरत है. हमे यही पर नही रुकना है. इकोनॉमी ने बेसक शानदार वापसी की है.

मार्केट में मनी फ्लो बढ़े, खरीदार आए , आर्थिक गतिविधियां बाधित न हो इसका ध्यान रखने की जरूरत है. आंकड़े इस बात का सबूत हैं. अप्रैल से जून 2021 के दौरान देश की( GDP ) 32.38 लाख करोड़ रुपए रही , जो अप्रैल जून 2020 के 26.95. लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 20.1 फीसदी अधिक है.

लेकिन दो साल यानी अप्रैल – जून 2019 में देश की ( GDP ) 35.66 लाख करोड़ रुपए थी यह कोविड से पहले के स्तर हैं. यानी मौजूदा वित्त वर्ष कि पहली तिमाही की( GDP) दो साल पहले के मुकाबले अब भी करीब 10 फीसदी हैं.

कोवीड के कारण आई आर्थिक मंदी से बाहर निकलने में और वक्त लग सकता है. भारत को इसी तरह के प्राइवेट फाइनल कंजप्सन एक्सपेंडिचर यानी आम लोगो द्वारा उपभोग पर खर्च की जाने वाली रकम अप्रैल जून 2021 के दौरान करीब 17.84 लाख करोड़ रुपए रही.

जो पिछले साल के 14.95 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले अधिक है. लेकिन दो साल पहले की इसी अवधि में यह 20.24 लाख करोड़ रुपए थी. इससे ये साबित होता है कि देश मे आम उपभोकताओ कि कंज्यूमर डिमांड अब भी दो साल पहले के स्तर को नही छू पाई.

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